
वाराणसी । निमोनिया आज भी दुनिया और भारत में मृत्यु के प्रमुख संक्रामक कारणों में से एक है। लेकिन अब एक नई चुनौती सामने आ रही है एंटी- बायोटिक प्रतिरोध की। दो हजार तेईस में विश्व स्तर पर लगभग हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण किसी ना किसी एंटीबॉयटिक के प्रति प्रतिरोधी पाया गया। भारत में ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की निगरानी रिपोटों में पाया गया कि निमोनिया और अन्य गंभीर संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणु जैसे ACINETO BACTER, KLEBSIELLA, STAPHYLOCOCCUS AUREUS में कई सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ रहा है। यदि एंटीबॉयटिक का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं किया गया, तो साधारण निमोनिया भी जानलेवा हो सकता है। यह बातें PGI Chandigarh के प्रोफेसर जोसेफ़ मैथ्यू नें अपने व्याख्यान में बतायी।डॉक्टर जगदीश चिन्नप्पा ने बताया कि दमा के रोगियों में एवं दमा के पीड़ित बच्चों के माँ / पिता में भी अवसाद की परेशानी भी पायी गई | कुछ वयस्क बच्चों में इस अवसाद के कारण इस बीमारी को ठीक करने में परेशानी आती है। भारतीय बाल अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर दिगांत शास्त्री ने इन्फ्लुएंज़ा एवं निमोनिया टीका पर विस्तृत चर्चा की तथा बताया कि भारतवर्ष में निमोनिया का टीका लगने के बाद से संक्रमण में काफ़ी कमी आई है। डॉक्टर के चुग ने अभिभावकों में इन्हेलर से इलाज के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इनहेलर से इलाज पूरी तरह कारगर है और इसकी आदत नहीं पड़ती है।चिकित्सक के परामर्श के अनुसार इन मरीजों को इनहेलर यथासमय तक लेते रहना चाहिए । सम्मेलन के समापन के अवसर पर मुख्य आयोजक सचिव डॉक्टर अशोक राय ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा सफ़ल आयोजन के लिए सभी को बधायी दी ।आयोजक सचिव डॉक्टर डी एम गुप्ता ने सभी ने सभी सदस्यों को स्मृति चिह्न प्रदान किया तथा कोषाध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।समापन के अवसर पर डॉक्टर विजय गुप्ता, डॉक्टर संजय पटेल, डॉक्टर अरुण त्रिपाठी, डॉक्टर एस पी पाल, डॉक्टर वी के मौर्या एवं अन्य भी उपस्थित थे ।।
