सियोल : उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री चो सन हुई ने उनके देश के हालिया अंतरमहाद्बीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षण की अमेरिका के साथ मिलकर निंदाकिए जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की आलोचना की। हुई ने गुतारेस को ‘अमेरिका की कठपुतली भी करार दिया।

गुतारेस ने शुक्रवार को उत्तर कोरिया के आईसीबीएम परीक्षण की कड़ी निदा करते हुए एक बयान जारी किया था और उससे ‘किसी भी भड़काऊ कार्रवाई को तुरंत रोकने का अपना आह्वान दोहराया था। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने विदेश मंत्री चो सन हुई के हवाले से एक बयान में कहा, ”मैं अक्सर संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अमरिका के व्हाइट हाउस या विदेश मंत्रालय का एक सदस्य पाता हूं।

उन्होंने कहा, ”इस तथ्य पर अपना गहरा खेद व्यक्त करता हूं कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्य एवं सिद्धांतों और सभी मामलों में निष्पक्षता एवं समानता बनाए रखने के अपने उचित मिशन को दरकिनार करते हुए बेहद निदनीय रवैया अपनाया है। हुई ने आरोप लगाया कि गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उत्तर कोरिया के आईसीबीएम परीक्षण की निदा करते समय अमेरिका और उसके सहयोगियों की कार्रवाइयों को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा, ”यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह अमेरिका की कठपुतली हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जापान के अनुरोध पर उत्तर कोरिया के आईसीबीएम प्रक्षेपण पर सोमवार सुबह एक आपात बैठक बुलाई है। हालांकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक में उत्तर कोरिया पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने का फैसला किया जा सकता है या नहीं, क्योंकि परिषद के स्थायी सदस्य चीन और रूस ने अमेरिका व उसके सहयोगियों के बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षणों को लेकर उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने का इस साल की शुरुआत में कड़ा विरोध किया था। जी7 समूह के सदस्य देशों के शीर्ष राजनयिकों ने रविवार को एक संयुक्त बयान जारी कर उत्तर कोरियाई मिसाइल प्रक्षेपण के जवाब में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्बारा कड़े कदम उठाने का आह्वान किया था।

जी7 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने एक बयान में कहा था, ”उत्तर कोरिया की कार्रवाइयों की अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकसाथ कड़ी निदा करनी चाहिए। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्बारा और अधिक महत्वपूर्ण कदम उठाने की भी जरूरत है। जी7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं।

उत्तर कोरिया ने शुक्रवार को एक और अंतरमहाद्बीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का प्रक्षेपण किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया का हथियारों का परीक्षण करने का मकसद अपने परमाणु शस्त्रागार को बढ़ाना और अंतत: कूटनीतिक वार्ता में दबाव की रणनीति के जरिये अधिक रियायतें हासिल करना है।

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