संयुक्त राष्ट्र। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया है जिसमें मॉस्को से यूक्रेन पर हमला रोकने और सभी सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की गयी है।

अमेरिका और उसके समर्थक जानते थे कि यह प्रस्ताव विफल हो जाएगा लेकिन उन्होंने दलील दी कि इससे रूस अंतरराष्ट्रीय रूप से अलग-थलग पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।

इस प्रस्ताव के विफल होने से समर्थकों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐसे ही प्रस्ताव पर शीघ्र मतदान कराने की मांग का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

उल्लेखनीय है कि 193 सदस्यीय महासभा में वीटो का प्रावधान नहीं है। अभी यह तय नहीं है कि कब मतदान होगा।

संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव पर मतदान में दो घंटे की देरी हुई। प्रस्ताव के सह-प्रायोजक अमेरिका और अल्बानिया इस पर समर्थन जुटाने के लिए इससे हिचकिचाने वाले देशों को एक साथ लाने की कवायद में जुटे रहे। अपने सहयोगी देश के साथ वीटो का इस्तेमाल करने के बजाय इससे दूर रहने के चीन के फैसले को कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिका की राजदूत लिडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने अपने रूसी समकक्ष से कहा, ”आप इस प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं लेकिन आप हमारी आवाज पर वीटो नहीं कर सकते। आप सच पर वीटो नहीं कर सकते। आप सिद्धांतों पर वीटो नहीं कर सकते। आप यूक्रेन की आवाम पर वीटो नहीं कर सकते।

ब्राजील के राजदूत रोनाल्डो कोस्टा फिल्हो ने कहा कि उनकी सरकार रूस की सैन्य कार्रवाई को लेकर ”बहुत चितित है। उन्होंने कहा, ”हद पार की गयी है और यह परिषद चुप नहीं बैठ सकती।

इनके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत ने अपने देश के उन दावों को दोहराया कि वह पूर्वी यूक्रेन के लोगों के लिए खड़ा है, जहां रूस समर्थित अलगाववादी आठ वर्षों से सरकार से लड़ रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों पर वहां यूक्रेन की ज्यादतियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ”आपने अपने भू-राजनीतिक खेल में यूक्रेन को एक मोहरा बना दिया है, जिसमें यूक्रेन के लोगों की हितों की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने विफल प्रस्ताव को ”कुछ नहीं बल्कि यूक्रेन के इस शतरंज में एक और क्रूर, अमानवीय कदम बताया।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने कहा कि सभी प्रयास कूटनीतिक समाधान के लिए होने चाहिए और कहा कि सुरक्षा परिषद को ”आग में घी डालने के बजाय बेहद सावधानी से कदम उठाना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से ”शांतिपूर्ण समाधान का दरवाजा पूरी तरह बंद हो सकता है और उन्होंने रूस के उन दावों को दोहराया कि पिछले कुछ वर्षों में नाटो के विस्तार से उसे धमकाया जा रहा है।

झांग ने कहा, ”रूस की वैध सुरक्षा आकांक्षाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए तथा उचित तरीके से उनसे निपटना चाहिए। यूक्रेन को पूर्वी और पश्चिम के बीच एक पुल बनना चाहिए न कि प्रमुख शक्तियों के बीच टकराव के चौकी।

ब्रिटेन की राजदूत बारबरा वुडवार्ड ने आत्म रक्षा में कार्रवाई करने के रूस के दावे को ”बेतुका बताया। उन्होंने कहा, ”रूस ने आत्म रक्षा में केवल एक काम किया है और वह है आज इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करना।

गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है। महासभा का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता लेकिन वह दुनिया की राय को दिखाता है।

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