
वाराणसी । आवर्तन संगीत संस्था एवं महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “लोक की अविरल धारा – कजरी कार्यशाला” का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने ऑफलाइन एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता करते हुए कजरी गायन की समृद्ध परंपरा से जुड़ने का संकल्प लिया।कार्यशाला की प्रशिक्षिका विदुषी सुचरिता गुप्ता ने कजरी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके सांगीतिक स्वरूप, भाव पक्ष एवं बनारस की लोक-सांस्कृतिक परंपरा में उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को कजरी गायन की बारीकियों, सुर, लय, उच्चारण एवं प्रस्तुति शैली का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।कार्यशाला में उपस्थित विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ अभ्यास किया तथा लोक संगीत के प्रति अपनी गहरी रुचि व्यक्त की। ऑनलाइन जुड़े प्रतिभागियों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए गुरु से सीधे संवाद स्थापित किया और अभ्यास में भाग लिया।आयोजकों ने बताया कि यह कार्यशाला केवल गायन का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, सावन की परंपराओं और कजरी विधा के संरक्षण एवं संवर्धन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों को मंच पर अपनी प्रस्तुति देने का भी अवसर प्रदान किया जाएगा।आवर्तन संगीत संस्था एवं महिला मंडल द्वारा आयोजित यह पहल लोक संगीत प्रेमियों, विद्यार्थियों एवं युवा कलाकारों के लिए एक प्रेरणादायी मंच सिद्ध हो रही है, जहाँ गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से भारतीय लोक संगीत की अमूल्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है ।।
