कराची | पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अपने खिलाड़यिों को ऑस्ट्रेलिया में होने वाले बीबीएल सीज़न में खेलने की अनुमति रूपी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने से मना कर दिया है, फिर चाहे वह अनुबंधित खिलाड़ी हों या नहीं। बोर्ड ने अगले साल यूएई में होने वाली नई प्रतियोगिता आईएलटी20 पर भी खिलाड़यिों की उपलब्धता पर कोई स्पष्टीकरण नहीं किया है। इस फèैसले का मुख्य कारण आने वाले समय में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यस्त कार्यक्रम समझा जा रहा है। हालांकि ऐसे में यह बात साफ नहीं है कि बिना अनुबंध वाले खिलाड़यिों पर रोक क्यों लगाई जा रही है।

बीबीएल के ड्राफट में पिक होने के लिए शुरुआती 98 विदेशी खिलाड़यिों की सूची में कोई पाकिस्तानी नाम नहीं था लेकिन ऐसा समझा जा रहा थीं कि डेडलाइन से पहले उन्हें शामिल कर लिया जाता। आईएलटी20 में अब तक औपचारिक रूप में किसी भी खिलाड़ी का नाम नहीं लिया गया है लेकिन कई शीर्ष के पाकिस्तानी खिलाड़यिों का नाम इस लीग के होने वाले करारों से जोड़ा गया है।यह पहली बार नहीं है जब खिलाड़यिों और बोर्ड के बीच लीग में शामिल होने पर असहमति हो सकती है। 2019 के नवंबर में खिलाड़यिो के हड़ताल तक की नौबत आ चुकी थी। कुछ समय से पीसीबी ने विदेशी लाग में हिस्सा लेने पर खिलाड़यिों के साथ एक अनौपचारिक पीएसएल प्लस वन नियम का समझौता बनाए रखा था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि रमीज़ राजा की अध्यक्षता में इस सिद्धांत को जारी रखा जा रहा है या नहीं।

अगले साल से आईएलटी20 के अलावा साउथ अफरीका में नया टी20 लीग भी खेला जाएगा और ऐसे में पाकिस्तानी खिलाड़यिों को टीमों में शामिल करने की मांगें बढे ही सकती हैं। हालांकि पाकिस्तान में नियमानुसार एनओसी प्राप्त करने से पहले ड्राफट में अपना नाम डालने के लिए भी खिलाड़यिों को पीसीबी से अनुमति लेनी पड़ती है। ऐसे में आईपीएल में खेलने के मौको से वंचित रहने वाले पाकिस्तानी खिलाड़यिों में अच्छी राशि ना कमा पाने को लेकर काफèी मायूसी है। बीच में पीसीबी के प्रस्तावित योजना के तहत अपने खिलाड़यिों को विदेशी लीग में ना खेल पाने पर उनकी आर्थिक भरपाई करवाने की बात चली थी, लेकिन इन लीगों की इनामी राशि देखते हुए बात आगे नहीं बढी है।

इसके अलावा पीसीबी ने हाल ही में घोषणा की थी कि सफेद गेंद और लाल गेंद क्रिकेट मिलाकर 2022-23 के लिए 33 केंद्रीय अनुबंध दिए जाएंगे। खिलाड़यिों ने इन पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी सलाह के लिए पहली कॉपी मांगी थी। ऐसा होने दूसरे देशों में आम बात है लेकिन पाकिस्तान में अक्सर 150 पेज के अनुबंध किसी दौरे से ठीक पहले खिलाड़यिों को थमाए जाते हैं और उनसे तुरंत हस्ताक्षर करवाए जाते हैं।फलिहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि केंद्रीय अनुबंधों के मुद्दे का सहारा लेकर पाकिस्तानी खिलाड़ी बोर्ड से एनओसी मामले में अपने फèैसले को बदलने पर मजबूर कर सकते हैं। हालांकि ऐसा होना असंभव भी नहीं। पाकिस्तान में फèलिहाल कोई प्लेयर्स एसोसिएशन भी नहीं है जो बोर्ड के साथ मध्यस्थता करने में मददगार साबित हों।

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