रेबीज़ जानलेवा बीमारी, एंटी रेबीज़
टीकाकरण से होगा सम्पूर्ण बचाव
- घाव को 15 मिनट तक साबुन व बहते साफ पानी से धोएँ
- घाव पर न लगाएं मिर्च, तेल या अन्य ज्वलनशील पदार्थ, अंधविश्वास से बचें
वाराणसी, 27 सितंबर 2022 – रेबीज़ की रोकथाम और इसके प्रति समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 28 सितंबर को विश्व रेबीज़ दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष इसकी थीम ‘रेबीज़ – वन हेल्थ, ज़ीरो डेथ’ निर्धारित की गयी है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने दी।
सीएमओ ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राष्ट्रीय रेबीज़ नियंत्रम कार्यक्रम के अंतर्गत हर साल यह दिवस अलग-अलग थीम पर मनाया जाता है जिससे सामुदायिक स्तर पर जानकारी जैसे घावों का उपचार, कुत्ते के काटने के मामले में घाव, पोस्ट एक्सपोजर टीकाकरण देखभाल, स्कूली बच्चों के लिए कुत्ते के काटने से बचाव की शिक्षा देना आदि के जरिये बचाव किया जा सकता है। उन्होने बताया कि यह दिवस फ्रांस के प्रसिद्ध रसायनज्ञ और सूक्ष्मजीवविज्ञानी लुई पाश्चर की पुण्यतिथि के अवसर पर मनाया जाता है, जिन्होंने पहला रेबीज़ टीका विकसित किया था तथा रेबीज़ के रोकथाम की नींव भी रखी थी।
नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ एसएस कन्नौजीया ने बताया कि शासन के निर्देश के क्रम में इस दिवस पर ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र के समस्त पीएचसी, सीएचसी व जिला व मंडलीय चिकित्सालय पर रेबीज़ के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार गतिविधियों और गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। डॉ कनौजिया ने बताया कि रेबीज़, एक विषाणु जनित व जानलेवा बीमारी है जिसका बचाव पूर्णता: संभव है। यह कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों के काटने या खरोंचने के कारण होता है। लक्षण आने से पूर्व एंटी रेबीज़ वैक्सीन के साथ इसको पूरी तरह से रोका जा सकता है।
क्या है रेबीज़ – डॉ कनौजिया ने बताया कि रेबीज़ से पीड़ित जानवर के काटने के बाद इसके लक्षण एक से तीन महीने में दिखाई देते हैं। कुत्ते, बिल्ली आदि सभी को प्रिय होते हैं लेकिन प्रायः कुत्ते के काटने और इस रोग के बारे में जागरूकता के बिना उनके साथ खेलते हैं। बच्चे डांट के डर से बचने के लिए माता-पिता से कुत्ते के काटने के घावों को छुपाते हैं। जानकारी के अभाव में काटने व खरोंच वाले घाव को इसको अनदेखा कर देते हैं या मिर्च, तेल जैसे घरेलू उत्पादों लगाकर घाव का उपचार करते हैं, जोकि गलत है। इसके लिए तुरंत नजदीकी चिकित्सालय जाकर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और उनकी सलाह अनुसार एंटी रेबीज़ टीकाकरण का कोर्स पूरा करना चाहिए। उन्होने बताया कि जनपद के सभी ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों सहित जिला व मंडलीय चिकित्सालय में एंटी रेबीज़ टीकाकरण की निःशुल्क सुविधा मौजूद है। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-5145 पर संपर्क कर सकते हैं या नजदीकी पीएचसी व सीएचसी से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
क्या करें –
- घाव को 15 मिनट तक साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएँ एवं स्प्रिट, एल्कोहल या घरेलू एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करें ।
- एंटी रेबीज़ टीकाकरण का पूर्ण कोर्स लें।
- अंधविश्वास से दूर रहें ।
क्या न करें – - हाथ से घाव छूना ।
- घाव पर मिट्टी, मिर्च, तेल, जड़ी-बूटियां चाक, पान की पत्तियों जैसे उत्तेजक पदार्थ लगाना ।
- घाव को ढकना या टांके लगवाना ।
- बच्चों को जानवरों के संपर्क में आने या उनके साथ खेलना ।
