वाराणसी श्री स्वयंभू नीलकंठेश्वर देवस्थान डावजे डोणजे पुणे से संकल्प लेकर
परमपूज्य गुरुवर्य शंकरराव ने कहा कि नशे से लाखों परिवार बर्बाद हो गया है नशा मुक्ति को पूरे देश में चलाने की आवश्यकता है कितने परिवार आज सड़क पर आकर भीख मांगने के लिए मजबूर हो गए हैं उक्त विचार शिवदास शंकर गुरु ने वाराणसी स्थित जंगम बाड़ी मठ में भक्तों मे एक प्रवचन के दौरान कहीं उन्होंने कहा कि सर्जे मामा जी को है. महाराज जी अभी यह नशा मुक्ती करवाने का काम वाराणसी मे करने के लिए आए है। पुणे से 50 किलोमीटर डावजे गांव की पहाड़ी पर अपनी फॉरेस्ट गार्ड की ड्युटी करते समय
भगवान शिवशंभोजी की कृपा से स्वयंभू शिवलिंग प्राप्त हुआ । उन्होने वह विरान पहाड़ी के ऊपर शिवजी के मंदिर की स्थापना की। पिछले पचास सालो में अधिकाधिक परिश्रम करके नीलकंठेश्वर देवस्थान का निर्माण किया। उस वीराना पहाड़ी को स्वर्ग बनाया। सन 1965 मे भगवान शिवशंभो की कृपा से उनको नशा मुक्ती का वरदान प्राप्त हुआ. तबसे लेके आजतक यह देवस्थान नशा मुक्ती का काम कर रहा है।पिछले पचास से ज्यादा सालों में देवस्थान ने एक करोड से भी ज्यादा लोगो की नशा मुक्ती करवाई है। यह काम जैसे देवस्थान मे चलता है वैसे जो लोग गरीब है और देवस्थान मे आ नही सकते, उनके लिए भी होता है। गुरुवर्य सर्जे मामाजी देशभर मे उनके गाव मे जा के उनकी नशा मुक्ती करते थे।
गुरुवर्य सर्जेमामा का 2013 मे देहावसन हो गया, उसके बाद उनके बडे बेटे गुरुवर्य शिवदास महाराज सर्जे देवस्थान का कार्य संभालते है. कार्यक्रम में मुख्य रूप से नरसिंह एडवोकेट अनिल सिंह प्रकाश गोरे वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र गिरी देवेंद्र सिंह डब्बू अखिलेश सिंह रमेश सिंह समेत सैकड़ों लोग कार्यक्रम में शामिल रहे
